Wednesday, 16 July 2025

अंतरिक्ष यात्री की जाति का मुद्दा छेड़ना बेहद निंदनीय

छ समय पहले कांग्रेस नेता राहुल गाँधी सौंदर्य प्रतियोगिताओं में किसी दलित या ओबीसी युवती के विजेता न बनने का मुद्दा उठाकर हंसी का पात्र बने थे। उसके पहले  केंद्रीय बजट बनाने वाले अधिकारियों के दल में जातियों के प्रतिनिधित्व का सवाल भी उन्होंने लोकसभा में उठाया था। उन बातों से जनता कितनी प्रभावित हुई इसका मोटा - मोटा अंदाज तो हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी पराजय से मिल गया। लेकिन  पार्टी के एक नेता उदित राज जरूर श्री गाँधी  का अनुसरण करते हुए इस तरह के बयान देकर सुर्खियों में आते रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर उन्होंने ये कहकर विवाद पैदा किया कि इसका नाम कुछ और रखा जाना चाहिए था क्योंकि सिंदूर एक खास धर्म से जुड़ा नाम है। इसी क्रम में उन्होंने  गत दिवस अंतर्राष्ट्रीय  अंतरिक्ष स्टेशन से अंतरिक्ष यात्रा पर गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के चयन पर ऐतराज जताते हुए कहा कि उनकी जगह किसी दलित अथवा ओबीसी को  भेजा जाना चाहिए था। उल्लेखनीय है शुभांशु  मिशन पूरा कर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से गत दिवस वापस लौट आए । उनकी सकुशल वापसी पर पूरा देश खुश है। लेकिन श्री राज ने अपने बयान में कहा कि जब  राकेश शर्मा अंतरिक्ष भेजे गए थे,  उस समय  दलित और ओबीसी समाज के लोग उतना पढ़े-लिखे नहीं थे । इसलिए  इस बार शुभांशु की जगह किसी दलित या ओबीसी व्यक्ति को अंतरिक्ष में भेजना चाहिए था। उदित राज   भारतीय राजस्व सेवा में अधिकारी रहने के बाद  राजनीति में आये और अपनी पार्टी बनाई।  2014 में भाजपा में शामिल होने के बाद दिल्ली की सुरक्षित सीट से लोकसभा के लिए चुने गए। लेकिन दोबारा टिकिट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी और आजकल कांग्रेस में हैं। केन्द्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते - करते अनेक अवसरों पर वे अवांछित टिप्पणी करने के कारण विवादास्पद होते रहे हैं। भाजपा यदि उनको सांसद बनाती रहती तब शायद वे प्रधानमंत्री का गुणगान करते घूमते। कांग्रेस में भी एक किनारे पड़े है इसलिए बयानों के जरिये अपनी कुंठा व्यक्त करना उनका काम रह गया है। अंतरिक्ष में शुभांशु शुक्ला  के बजाय किसी दलित अथवा ओबीसी को भेजे भेजे जाने जैसा सवाल उठाकर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा खींची गई लकीर को ही आगे बढ़ाया है । लेकिन  ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े विषय में भी जिस इंसान को धर्म विशेष नजर आया  उसकी मानसिकता का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। अंतरिक्ष के अभियान पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी दक्षता से जुड़े होते हैं। इससे जुड़े किसी भी व्यक्ति का चयन जाति या धर्म के आधार पर करने की बात सोचना ही हास्यास्पद है। और फिर शुभांशु जिस मिशन पर गए थे वह अंतर्राष्ट्रीय था जिसमें भारत की हिस्सेदारी महज अंतरिक्ष यात्री भेजने तक सीमित थी। निकट भविष्य में जिस महत्वाकांक्षी  गगन यान परियोजना पर इसरो काम कर रहा है उसके लिए शुभांशु द्वारा अंतरिक्ष में किये गए प्रयोग बेहद उपयोगी होंगे। और उनकी यह यात्रा मुफ्त में नहीं हुई। उस पर भारत ने अरबों रुपए का शुल्क चुकाया है। अच्छा होता शुभांशु की उपलब्धियों और उनसे भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को मिलने वाले लाभ की चर्चा हो जिससे अधिकतम युवा इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हों। यदि अंतरिक्ष कार्यक्रम जैसे अति तकनीकी क्षेत्र को भी जाति जैसे विवादों में उलझाया जाएगा तब उसकी दुर्गति को कोई नहीं रोक पाएगा। आज भी इसरो में तमाम ऐसे वैज्ञानिक और  तकनीशियन कार्यरत हैं जो ऊँची जाति के नहीं हैं किंतु उनकी पहिचान और प्रतिष्ठा उनकी जाति से नहीं अपितु उनके काम पर आधारित है। उदित राज जैसे और भी लोग सार्वजनिक जीवन में हैं जो दलितों  और पिछड़ों की आड़ लेकर अपना महत्व बढ़ाने में लगे हुए हैं। हालांकि श्री राज ने शुभांशु को शुभकामना तो दी किंतु उनकी जाति का विवाद पैदा कर दूध में नींबू निचोड़ने की हरकत भी  कर डाली। बेहतर तो यही होता कि कांग्रेस उनके बयान की निंदा करते हुए  हिदायत देती कि वे भविष्य में इस तरह के बयानों और टिप्पणियों से परहेज करें। लेकिन सवाल ये है कि जब  श्री गाँधी खुद ही जाति को लेकर ऊलजलूल बयानबाजी किया करते हैं तब बाकी पार्टी जनों को भला कौन रोक सकेगा? 

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