Saturday, 26 July 2025

मोदी के झटके से मालदीव की अक्ल ठिकाने आ गई

ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार संधि करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंद महासागर में स्थित मालदीव जा पहुंचे। दुनिया के इस सबसे छोटे मुस्लिम देश की मुख्य आय का स्रोत पर्यटन है जिसमें भारत की हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के साथ इसके रिश्ते हमेशा से आत्मीयतापूर्ण रहे। यहाँ तक कि इसकी रक्षा के लिए भारतीय नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियां भी तैनात रहीं। 1988 में श्रीलंका में सक्रिय लिट्टे नामक आतंकवादी संगठन ने मालदीव में सत्ता परिवर्तन हेतु हमला किया जिसमें वहीं के अब्दुल्ला लुत्फी नामक विद्रोही का हाथ था किंतु भारत के सैन्य हस्तक्षेप ने उस षडयंत्र को विफल कर दिया जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी मधुर बने रहे। लेकिन बीते कुछ वर्षों में चीन ने श्री लंका की तरह से ही मालदीव में भी अपना प्रभाव बढ़ाते हुए भारत विरोधी भावना को भड़काया और उसमें उसका मोहरा बने राष्ट्रपति उम्मीदवार  मोहम्मद मुइज्जू । 2023 में हुए चुनाव में मुइज्जू ने भारत विरोधी अभियान चलाकर चुनाव जीत लिया और गद्दी संभालते ही इंडिया आउट के नारे को अमली जामा पहिनाते हुए भारत से जुड़ी हर चीज का विरोध शुरू कर दिया। यहाँ तक कि भारतीय वायुसेना के जो हेलीकाप्टर बचाव कार्यों के लिए दिये गए  थे उनके पायलटों तक को देश छोड़ने मजबूर कर दिया। उन पर भारत विरोध का भूत इस बुरी तरह सवार था कि वे तत्काल चीन जा पहुंचे जिसने उन्हें हरसंभव सहायता देने का भरोसा तो दे दिया किंतु दोनों के बीच भौगोलिक  दूरी काफी होने से व्यवहारिक परेशानियां आने लगीं। मुइज्जू सरकार का चीन के पाले में खड़े होना मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता मानी गई । इस बात की आशंका भी पैदा हो गई कि चीन मालदीव में अपना सैन्य  अड्डा बनाकर भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा। लेकिन प्रधानमंत्री ने बिना कोई प्रतिक्रिया व्यक्त किये जनवरी 2024 में लक्षद्वीप की यात्रा की और समुद्र तट पर बैठकर वहाँ के नैसर्गिक सौंदर्य की तारीफ करते हुए भारतीय पर्यटकों से लक्षद्वीप आने का आह्वान कर दिया। उस  दांव का चमत्कारिक असर हुआ। भारतीय पर्यटकों ने धड़ाधड़ मालदीव की यात्रा रद्द कर दी। इसके अलावा भारतीय पर्यटन उद्योग ने लक्षद्वीप में मूलभूत संरचना के विकास में निवेश शुरू कर दिया। मालदीव की अर्थव्यवस्था इस छोटे से झटके से लड़खड़ा गई। वहाँ की पर्यटन एजेंसियां भारत सरकार से गुहार लगाने लगीं। दूसरी तरफ मुइज्जू जिस चीन के दम पर भारत को अकड़ दिखा रहे थे वह भी  उसकी  मदद नहीं कर सका। इससे मालदीव की अक्ल ठिकाने आने लगी और तब मुइज्जू ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए हाथ - पाँव मारे और अक्टूबर 2024 में भारत यात्रा पर आये। हालांकि उनके देश के मुस्लिम कट्टरपंथी इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। बीच में पाकिस्तान ने भी मालदीव में अपने पैर जमाने की कोशिश की किंतु अपनी आंतरिक समस्या में उलझे होने से वह सफल नहीं हो सका। भारत ने इसका लाभ उठाया जिसका सुपरिणाम प्रधानमंत्री श्री मोदी की दो दिवसीय यात्रा है। वे मालदीव के 60 वें राष्ट्रीय दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि वहाँ गए हैं। मालदीव के सुरक्षा मंत्रालय के भवन का शुभारंभ उनके हाथों से होना बड़ा कूटनीतिक संकेत है। प्रधानमंत्री ने मालदीव को बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा के साथ ही उसके विकास के लिए अनेक समझौते किये। इस यात्रा की सबसे बड़ी बात राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा भारत और श्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए तारीफ के पुल बांधना है। इंडिया आउट के नारे के बल पर सत्ता में आये मुइज्जू को जल्द ही समझ आ गया कि बिना भारत के उनकी गाड़ी नहीं चलने वाली। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास 45 दिनों तक के लिए   विदेशी मुद्रा बची थी। हालांकि वे चीन और टर्की दोनों का दौरा कर आये किंतु अंततः भारत ने ही हाथ आगे बढ़ाया। उसी के बाद उनका झुकाव भारत की तरफ हुआ। उनकी  सरकार बनने के बाद  प्रधानमंत्री श्री मोदी पहले विदेशी नेता हैं जो मालदीव की यात्रा पर आये हैं। श्रीलंका के बाद मालदीव द्वारा भी हमारे साथ रिश्ते सुधारने की पहल भारत के बढ़ते महत्व का परिचायक है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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