Friday, 18 July 2025

स्वच्छता पुरस्कार की बजाय संस्कार से जुड़े



राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत गत दिवस विभिन्न श्रेणियों में अनेक शहरों को पुरस्कृत किया गया। म.प्र के  इंदौर ने जहाँ लगातार आठवें वर्ष  सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल किया वहीं जबलपुर ने भी पांचवा स्थान अर्जित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद पूरे देश में स्वच्छता का अभियान चलाया और खुद भी झाड़ू उठाकर लोगों को प्रेरित किया तो उसका सकारात्मक असर पूरे देश में हुआ। सरकारी अमला तो जुटा ही स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी उसमें बढ़ - चढ़कर हिस्सा लिया तथा  आम जनता भी आगे आई। घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था ने भी स्वच्छता की स्थिति में सुधार किया। यद्यपि ये दावा नहीं किया जा सकता कि भारत ने वैश्विक स्तर को छू लिया है और वह सिंगापुर सरीखा साफ - सुथरा हो गया किंतु इतना तो कहा ही जा सकता है कि बीते 11 सालों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है और समाज ने इस मिशन के प्रति अपना समर्थन और सहयोग प्रदान किया। विशेष रूप से शालेय विद्यार्थियों में भी स्वच्छता एक आदत के तौर पर देखी जा सकती है जो इस अभियान के उज्ज्वल भविष्य  की गारंटी है। उल्लेखनीय है जब प्रधानमंत्री के आग्रह पर स्वच्छता अभियान से बड़ी संख्या में युवा जुड़े तब कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कटाक्ष किया था कि बजाय रोजगार के श्री मोदी ने उनके हाथ में झाड़ू थमा दी। कुछ लोगों को स्वच्छता अभियान और उसकी प्रतियोगिता व्यर्थ की कवायद लगी और इसे मूल समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने का दाँव कहकर  मजाक भी बनाया गया।  ऐसा ही रवैया शौचालय को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई योजना देखने मिला। लेकिन कुछ सालों बाद देश ने ये अनुभव किया कि स्वच्छता और शौचालय जैसे विषयों पर  आजादी के बाद ही जोर दिया गया होता तब भारत की तस्वीर कहीं बेहतर होती। उस दृष्टि से  2014 के बाद स्वच्छता और शौचालय पर ध्यान देना किसी सामाजिक क्रांति से कम नहीं है। प्रधानमंत्री के आलोचक भी उनकी जिन बातों के लिए प्रशंसा करने  में नहीं हिचकिचाते  उनमें स्वच्छता सबसे प्रमुख है। ये बात सही है कि स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत दिये जाने वाले पुरस्कारों के लालच में नगरीय निकाय साफ - सफाई की तरफ अधिक ध्यान देने लगे हैं , लेकिन आम जनता में भी अपने शहर को स्वच्छता  पुरस्कार मिले इसकी ललक पैदा हुई है। इंदौर यदि लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है तो इसका जितना श्रेय वहाँ की नगरनिगम को है उससे अधिक इंदौर के नागरिकों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने स्वच्छता को अपना स्वभाव बना लिया। हालांकि कुछ शहरों में स्वच्छता का अभियान स्वच्छ सर्वेक्षण के पहले ही शुरू होता है जबकि कुछ ने इसे स्थायी तौर पर अपना लिया। भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ अग्रसर है। हमारे यहाँ विदेशी पर्यटकों का आना - जाना भी बढ़ता जा रहा है। जी- 20 जैसे विश्वस्तरीय आयोजन भी होने लगे हैं। आईपीएल की सफलता के बाद अब देश ओलंपिक की मेजबानी के लिए दावेदारी कर रहा है। ऐसे में  आवश्यक है कि भारत साफ -  सफाई में भी दुनिया के संपन्न देशों की बराबरी से खड़ा हो। जिन शहरों ने स्वच्छता में पुरस्कार अर्जित किया और बीते वर्षों की अपेक्षा अपनी स्थिति में सुधार किया वे बधाई के पात्र हैं और उनके वाशिंदे प्रशंसा के।   बेहतर होगा केंद्र के अलावा राज्य सरकारें भी स्वच्छता  प्रतियोगिता आयोजित करें जिससे  इस दिशा में किये जाने वाले प्रयास और भी ज्यादा प्रभावशाली हों। लोगों को ये समझाने की आवश्यकता है कि स्वच्छता पुरस्कार से  प्रेरित न होकर संस्कारों से जुड़ी होना चाहिए।

- रवीन्द्र वाजपेयी

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