Wednesday, 30 July 2025

विपक्ष अपनी गलतियों से सीख नहीं ले रहा


लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की बहस गत दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 100 मिनट लंबे जवाब के बाद खत्म हो गई । विपक्ष ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार पर किये गए हमलों को ही दोहराया जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देकर हिसाब चुकता किया। लेकिन उस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से किये गए पलटवार ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। भले ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी गुस्से में टेबल पर हाथ पटकते दिखे किंतु उन्होंने और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा सहित पार्टी के अन्य सांसदों द्वारा सरकार पर छोड़े गए तीर लौटकर उन्हीं पर गिरे। मसलन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान के हौसले पस्त हो चुके थे तब युद्धविराम क्यों किया गया और पाक अधिकृत कश्मीर को हासिल करने का प्रयास क्यों नहीं हुआ , जैसे सवालों पर सरकार की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य पहलगाम की घटना के बाद आतंकवादियों की कमर तोड़ना था और हमारी सेना ने यह लक्ष्य कुछ ही मिनटों में हासिल करते हुए पाकिस्तान  स्थित आतंकवादियों के अनेक अड्डों को तबाह कर दिया। असैनिक प्रतिष्ठानों को भारत ने किसी भी प्रकार  से निशाना नहीं बनाया। जहाँ तक बात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से पर हमला कर उसे हासिल करने की है तो कांग्रेस नेताओं से जब ये सवाल पूछा गया कि 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद हमारे कब्जे में आये 90 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी युद्धबंदियों को छोड़ने के एवज में  शिमला समझौते में स्व. इंदिरा गाँधी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से को वापस लेने का दबाव क्यों नहीं बनाया तब उनके पास सिवाय बगलें झांकने के और कोई विकल्प नहीं था। राहुल गाँधी लगातार ये आरोप दोहरा रहे हैं कि आपरेशन सिंदूर को अचानक  रोककर जो युद्धविराम किया गया वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में हुआ। चूंकि ट्रम्प आये दिन ये दावा करते हैं कि युद्धविराम उनके प्रयासों से हुआ इसलिए श्री गाँधी को  आरोप दोहराने का अवसर मिलता रहा। यद्यपि सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसका खंडन किया किंतु विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और प्रधानमंत्री से लगातार स्पष्टीकरण की मांग कर रहा था। लोकसभा में उनसे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर हालांकि साफ कर चुके थे कि युद्धविराम किसी भी देश के दबाव या मध्यस्थता से नहीं हुआ किंतु गत दिवस श्री मोदी ने इस बारे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं के प्रहार से घबराकर पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य अधिकारी को फोन पर हमले रोकने की गुहार लगाई गई। चूंकि हमारी सेना ने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए थे इसलिए जंग रोकने का निर्णय लिया गया। इस बारे में सरकार पहले भी बता चुकी थी । सवाल ये है कि विपक्ष ने ऐसा कौन सा मुद्दा उठाया जिसमें कुछ भी नया हो। लेकिन सत्ता पक्ष ने अपने पुराने जवाबों को ज्यादा मुस्तैदी  से सदन में रखने के साथ ही कांग्रेस शासन में देश की जमीन पाकिस्तान, चीन और श्रीलंका को सौंपे जाने की जानकारी दी तब कांग्रेस का कोई नेता उसका खंडन नहीं कर सका। इस प्रकार महीनों से पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर नकारात्मक वातावरण बना रही कांग्रेस को खुद रक्षात्मक होना पड़ा। पहलगाम हमले के कसूरवार आतंकवादियों को सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए जाने की खबर ने भी विपक्ष के हौसले ठंडे कर दिये। आज राज्यसभा में भी चर्चा हो रही है। वहाँ भी विपक्ष के हाथ कुछ नहीं लगने वाला। इसका कारण मुद्दों का गलत चयन है। ये देश सेना के पराक्रम पर  संदेह करने वालों को पसंद नहीं करता। पुलवामा हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगने वालों को जनता ने धूल चटा दी थी। लेकिन उससे सबक नहीं लिया गया। इसी तरह रफैल विमानों की खरीद पर सवाल उठाने का खामियाजा भी श्री गाँधी भुगत चुके हैं। आश्चर्य की बात है विपक्ष अपनी गलतियों से कोई सीख नहीं ले रहा जिससे भाजपा को मज़बूती मिल रही है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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