लोकसभा में गत दिवस ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा प्रारंभ होने के पहले वरिष्ट कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान ने कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। पिछले दिनों एक न्यूज पोर्टल से बातचीत में उन्होंने पहलगाम हमले को लेकर कहा कि सरकार यह बताने को तैयार नहीं हैं कि पिछले कुछ हफ्तों में एनआईए ने क्या किया? क्या उन्होंने आंतकियों की पहचान कर ली है, वे कहां से आए थे, क्या पता वो देश के भीतर ही तैयार किए गए होम ग्रोन आतंकी हों।आपने क्यों यह मान लिया वो पाकिस्तान से आए थे, इसका कोई सबूत नहीं है। उल्लेखनीय है श्री चिदंबरम देश के पूर्व गृह मंत्री होने के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ट अधिवक्ता भी हैं। उनके उक्त बयान से पाकिस्तान को क्लीन चिट मिल गई । स्मरणीय है पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने आरोप लगाया था कि उसमें पाकिस्तान का हाथ था और वारदात को अंजाम देने वाले आतंकवादी वहीं से आये थे। ऑपरेशन सिंदूर का आधार ही यही था। पहलगाम की घटना के बाद जब केन्द्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्षी नेताओं को जानकारी दी तब सभी ने सरकार को पूरी छूट देते हुए किसी भी कार्रवाई के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त कर दुनिया को भारत की एकता का संदेश दिया। उस बैठक में हालांकि पहलगाम में सुरक्षा प्रबंधों की कमी का मुद्दा तो उठा किंतु किसी ने भी आतंकवादियों की पहिचान का सवाल नहीं उठाया। पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य कार्रवाई का भी पूरे देश ने समर्थन किया। भारत ने सं. रा. संघ सहित सभी वैश्विक मंचों पर पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया था कि उस हत्याकांड को अंजाम देने वाले वहीं से आये थे। एक आतँकवादी संगठन टी.आर.एफ ( द रेजिस्टेंस फ्रंट ) ने इसकी जिम्मेदारी भी ली जिसे लश्कर ए तैयबा का संरक्षण बताया जाता है। हाल ही में अमेरिका ने भी इसे प्रतिबंधित किया है। इसी के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के अड्डे और प्रशिक्षण केंद्र नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू करते हुए आतंकवादियों के ठिकानों पर मिसाइलें दागकर उन्हें जमींदोज किया गया । बड़ी संख्या में आतँकवादी और उनके परिवार के सदस्य मारे गए। कुल चार दिनों तक चले इस सैन्य अभियान ने पूरे विश्व में भारतीय सेना के रण कौशल और तकनीकी श्रेष्ठता का डंका पीट दिया। लेकिन उसके बाद से ही विपक्ष लगातार ऐसे सवाल उठा रहा है जिनसे पाकिस्तान खुद को निर्दोष साबित कर सके। श्री चिदंबरम का ताजा बयान उसी की कड़ी है। उनके ये कहने से कि पहलगाम में आतंकी हमला करने वाले पाकिस्तान से आये इसका कोई सबूत नहीं है और ये हो सकता है वे देश में ही तैयार किये गए आतंकी हों, ऐसा प्रतीत होता है मानो वे पाकिस्तान के वकील की हैसियत से किसी अदालत में जिरह कर रहे हों। भाजपा द्वारा उनके बयान पर जो आपत्ति की जा रही है उसे राजनीतिक पैंतरा मानकर दरकिनार कर भी दें किंतु जिस आरोप को कारण बताकर भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर किया गया, उसी पर संदेह व्यक्त कर श्री चिदंबरम ने शत्रु राष्ट्र को बचाव का अवसर दे दिया। अब वे कितना भी कहें कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया किंतु जुबान से निकले शब्द उस तीर की तरह होते हैं जो वापस नहीं आते। हो सकता है कांग्रेस उनके इस बयान को उनकी निजी राय बताकर पिंड छुड़ा ले किंतु पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष , विशेष तौर पर कांग्रेस के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं उनसे उनकी छवि तो खराब हो ही रही है लेकिन उससे बड़ा नुकसान ये है कि पाकिस्तान को बेगुनाही का प्रमाणपत्र मिल रहा है। राजनीतिक नफे - नुकसान अपनी जगह है। विपक्ष का सरकार को घेरना भी लोकतंत्र में अस्वाभाविक नहीं है। गत दिवस लोकसभा में कांग्रेस के कुछ युवा सांसदों ने भी ऑपरेशन सिंदूर के बारे में गैर जिम्मेदाराना बातें कहीं किंतु श्री चिदंबरम के सुदीर्घ राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उनसे ऐसे बयान की अपेक्षा नहीं की जाती जिससे शत्रु देश को अपना बचाव करने का मौका मिल जाए। वे संसद के उच्च सदन के वरिष्ट सदस्य भी हैं । बेहतर होगा वहाँ वे अपनी भूल सुधारते हुए दायित्वबोध का परिचय दें क्योंकि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला समूचे देश पर था जिससे वे अलग नहीं हैं। और ऑपरेशन सिंदूर हमारे पुश्तैनी दुश्मन की कमर तोड़ने के लिए उठाया गया कदम था जिसकी सफलता पर संदेह करना सेना के मनोबल को गिराने का कारण बने बिना नहीं रहेगा। हमारे देश में सरकार किसी की भी रही हो किंतु जब- जब देश की सुरक्षा और सम्मान पर संकट उत्पन्न हुआ तब - तब सत्ता और विपक्ष एक ही स्वर में बोले । चाहे पराजय मिली हो या विजय लेकिन सेना के शौर्य पर कभी शंका व्यक्त नहीं की गयी । लेकिन अब राजनीति , राष्ट्रनीति पर भारी पड़ती लग रही है जो कि अच्छा संकेत नहीं हैं।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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