उ.प्र के बलरामपुर जिले में छांगुर बाबा ( असली नाम जमालुद्दीन) नामक एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हो रहे हैं वे चौंकाने वाले हैं। छांगुर बाबा पर हिन्दू लड़कियों को पैसे का लालच देकर मुस्लिम धर्म स्वीकार करवाने का आरोप है। गत दिवस उसके 40 कमरे वाले अड्डे पर बुलडोजर चला दिया गया। छांगुर बाबा का गिरोह जाति के हिसाब से धर्मान्तरण की कीमत अदा करता था उदाहरण के लिए अगड़ी जाति के लिए 15 से 16 लाख दिये जाते, वहीं पिछड़ी जाति के लिए 10 से 12 और अन्य को 8 से 10 लाख देकर मुस्लिम बनाया जाता था। बाबा खुद को सूफी संत के तौर पर पेश करता रहा। उसने अब तक 50 बार मुस्लिम देशों की यात्राएं कीं। गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि उसे विदेशों से 100 करोड़ रु. मिले जिनका उपयोग धर्मांतरण के लिए किया जाता रहा। चूंकि मामला विदेशी फंडिंग से जुड़ा है इसलिए जाँच में ईडी को भी शामिल किया जा सकता है। बहरहाल छांगुर बाबा के पकड़े जाने के बाद अब ये बात साफ हो गई है कि भारत के इस्लामीकरण का षडयंत्र कितना गहरा है। उ.प्र के जिस इलाके में छांगुर बाबा का अड्डा था वह नेपाल से सटा तराई का इलाका है। इसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ बड़े पैमाने पर मुस्लिमों को बसाया जा रहा है। ये स्थिति बिहार तक देखी जा सकती है जहाँ पिछले विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के 5 विधायक जीतने से बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट महसूस की जाने लगी। नेपाल से सटे इलाकों में मुस्लिम आबादी का लगातार बढ़ना कई आशंकाओं को जन्म देता है। उल्लेखनीय है बिहार , असम और प. बंगाल के अनेक जिलों में जनसंख्या संतुलन पूरी तरह से मुसलमानों के पक्ष में झुक जाने से राजनीतिक स्थितियाँ भी इकतरफा होती जा रही हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों में बांग्ला देशी और रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को भी आसानी से पनाह मिल जाती है। इसी तरह की चिंताजनक खबरें पंजाब के उन सीमावर्ती जिलों से आ रही हैं जहाँ बड़ी संख्या में सिख आबादी ईसाइयत में ढलती जा रही है। अमृतसर जैसे जिले में भी जहाँ सिखों को अत्यन्त पवित्र अकाल तख्त स्थित है, बड़े पैमाने पर सिखों का धर्मांतरण करवाकर उन्हें ईसाई बनाया गया है और ये सिलसिला बेरोकटोक जारी है। इस समस्या के प्रति लोगों के कान उस समय खड़े हुए जब कांग्रेस द्वारा चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया जिनके बारे में प्रचारित हुआ कि वे ईसाई बन चुके थे। हालांकि बाद में इसका खंडन हुआ जिसमें बताया गया वे रामदासिया समुदाय से हैं जिसे दलित माना जाता है। लेकिन देखने वाली बात ये है कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठ चुके प्रगतिशील सिख समुदाय का दलित वर्ग ईसाइयत की तरफ झुकता जा रहा है जिसे रोकने में सिखों की धार्मिक संस्थाएं विफल साबित हो रही हैं। इस बारे में चिंता का विषय ये है कि कैनेडा जैसा ईसाई बहुल देश खालिस्तानी आतंकवादियों को भारत विरोधी गतिविधियां संचालित करने के लिए मदद करता आया है। उस कारण से कैनेडा खालिस्तानियों का गढ़ बन चुका है। ये देखते हुए पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब के जिलों का ईसाईकरण देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। पूर्वोत्तर से पंजाब तक सीमावर्ती जिलों में अल्पसंख्यकों की बढ़ती आबादी देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। ये कहना गलत नहीं होगा कि देश के जिस भी क्षेत्र में हिन्दू अल्पसंख्यक होते हैं वहाँ अलगाववादी गतिविधियां बढ़ने लगती हैं। उस दृष्टि से चाहे छांगुर बाबा हों या पंजाब में सक्रिय ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां, इन सभी के विदेशी जुड़ाव का खुलासा जरूरी है। दुख की बात है कि वोट बैंक के लालच में विभिन्न राजनीतिक दल लोभ, लालच और धोखा देकर हिंदुओं को मुस्लिम और ईसाई बनाये जाने पर मुँह में दही जमाये बैठे रहते हैं।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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