Thursday, 24 July 2025

विदेशियों को मतदाता सूची से बाहर करने का विरोध देशहित में नहीं


बिहार में मतदाता सूचियों की सघन जाँच को लेकर राज्य विधानसभा से संसद तक में विपक्ष का  हंगामा जारी है। लालू प्रसाद यादव के बेटे और महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने तो चुनाव के बहिष्कार तक की धमकी दे डाली । हालांकि सब जानते हैं कि वह बंदर घुड़की ही है। इधर राहुल गाँधी  अब तक महाराष्ट्र चुनाव में हुई करारी हार से नहीं उबर पा रहे और आये दिन भाजपा पर चुनाव चुराने का आरोप लगाने के साथ ही चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करते हैं। उनका कहना है कि भाजपा  को महाराष्ट्र में मिली जबरदस्त सफलता का कारण लाखों नये मतदाताओं के नाम जोड़ना था। यद्यपि वे हरियाणा में कांग्रेस की हार पर कुछ नहीं बोलते क्योंकि वहाँ पार्टी की गुटबाजी सतह पर थी। दरअसल बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की बारीकी से जाँच करने के कारण बड़ी संख्या में उन मतदाताओं के नाम सूचियों से बाहर होने के आसार बढ़ गए हैं जो निर्धारित  मापदंडों के अनुसार जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा पा रहे।  विपक्ष को आयोग के इस फैसले पर घोर आपत्ति है। इसके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएं भी विचाराधीन हैं जिसने आधार सहित कुछ दस्तावेजों को मान्य करने के निर्देश आयोग को दिये। अंतिम निर्णय अभी आना शेष है। लेकिन विपक्ष किसी भी तरह मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण रुकवाने पर आमादा है। उसका आरोप है कि इस प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के नाम कटेंगे वे उसके समर्थक हैं।उधर आयोग लगातार आश्वासन देता आ रहा है कि नाम कटने पर मतदाता अपील कर सकेगा किंतु विपक्ष कुछ भी सुनने राजी नहीं हैं। वैसे भी ये दावा सही नहीं है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूचियों से अलग किये जा रहे हैं वे सभी गैर भाजपाई दलों के समर्थक हैं । असलियत ये है कि इस मुहिम का उद्देश्य उन लोगों को मताधिकार से वंचित करना है जो भारत के नागरिक नहीं होने पर भी अवैध तरीके से मतदाता बन बैठे।  इनमें बड़ी संख्या बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की है इसलिए तेजस्वी और राहुल चिंता में डूबे हुए हैं। इन घुसपैठियों में ज्यादातर मुसलमान हैं जिन्हें राजद और कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दल अपना प्रतिबद्ध मतदाता मानते हैं। चुनाव आयोग इस बात को जानता है कि उसे किन - किन मुसीबतों से गुजरना होगा। इसीलिए उसने पूरी कोशिश की है कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी न रहे और सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर भी मिले । विपक्ष इस मुहिम का विरोध इसलिए कर रहा है कि  मतदाता बने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये जाहिर तौर पर भाजपा के विरोधी हैं क्योंकि वह उन्हें निकाल बाहर करने की पक्षधर है। खबर है चुनाव आयोग बिहार से फुरसत पाते ही प. बंगाल में भी मतदाता सूचियों के सघन पुनरीक्षण का अभियान शुरू करने वाला है जहाँ 2026 में  विधानसभा चुनाव होंगे। इसीलिए ममता बैनर्जी ने अभी से पुनरीक्षण के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। लेकिन इससे ये स्पष्ट है कि तेजस्वी, राहुल और ममता जैसे राजनेताओं के कारण ही पड़ोसी देशों से आये घुसपैठियों को देश में न सिर्फ रहने का अवसर मिला बल्कि अवैध तरीके से उन्होंने भारतीय नागरिकों को उपलब्ध सुविधाएं भी हासिल कर लीं । जाहिर है ऐसा राजनीतिक संरक्षण और नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण ही संभव हो सका। देशहित में सोचें तो मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की इस मुहिम से अवैध तरीकों से देश में बस गए विदेशी नागरिकों का पर्दाफाश हो सकेगा। यदि सर्वोच्च न्यायालय ने कोई रोक नहीं लगाई तब चुनाव आयोग का हौसला और बढ़ जाएगा। वैसे तो बांग्लादेशी और रोहिंग्या पूरे देश में फैले हुए हैं लेकिन बिहार, प. बंगाल, असम  त्रिपुरा सहित बाकी पूर्वोत्तर राज्यों में उनकी वजह से जनसंख्या संतुलन बिगड़ने के कारण राजनीति भी प्रभावित होने लगी है। इसीलिए इस मुहिम का इतना विरोध हो रहा है। जबकि होना तो ये चाहिए कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से अलग करने की मुहिम का सभी राजनीतिक दल  समर्थन करें। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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