म.प्र में भ्रष्टाचार का बड़ा प्रकरण चर्चा में है। आधा क्विंटल सोना, करोड़ों की नगद राशि और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हो चुके हैं। एक डायरी भी मिली जिसमें कतिपय नेताओं और अधिकारियों से जुड़े लेन - देन का ब्यौरा बताया जा रहा है। लोकायुक्त और आयकर के बाद अब ईडी भी उस मामले से जुड़ गई है। सबसे बड़ी बात ये है कि इतने बड़े घोटाले का कर्ताधर्ता परिवहन विभाग का एक अदना सा पूर्व आरक्षक है जिसने अनुकंपा नियुक्ति के जरिये नौकरी प्राप्त करने के बाद बहुत ही कम समय में करोड़ों - अरबों का वह साम्राज्य खड़ा कर दिया जो किसी भी शासकीय कर्मचारी के लिए सपने में भी असंभव है। सौरभ शर्मा नामक उक्त आरक्षक का मित्र चेतन गौर भी इस कांड में शामिल है जिसके नाम से वह पूरा कारोबार करता था। फ़िलहाल सौरभ दुबई में बताया जाता है जहाँ से उसके प्रत्यर्पण के प्रयास चल रहे हैं। जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं उनके आधार पर ये कहना गलत नहीं है कि ये मामला किसी छोटे से सरकारी कर्मचारी द्वारा की गई क़ाली कमाई का सबसे बड़ा प्रकरण होगा। इसके पूर्व भी सरकार के अनेक भृत्य और पटवारी स्तर के कर्मचारियों के यहाँ छापों में जप्त की गई धनराशि और उनकी संपत्तियों का विवरण इस बात को प्रमाणित करता है कि यहाँ की सरकारी मशीनरी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है। सरकार दावा करती है कि उसके दफ्तरों में ऐसी कार्य प्रणाली लागू है जिससे आम जनता का काम बिना घूस दिये हो। लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। सौरभ शर्मा जैसे न जाने कितने सरकारी महकमों में कुंडली जमाये बैठे हैं। जो जानकारी आ रही है उससे तो लगता है मानों वह आरक्षक न होकर परिवहन विभाग का कोई बड़ा अधिकारी रहा हो । विपक्षी दल परिवहन मंत्री को घेर रहा है। इस मामले में सत्ता पक्ष निश्चित रूप से दबाव में है। आरोप पूर्व मुख्य सचिव पर भी लग रहे हैं जिन्होंने अपनी सफाई भी दे डाली। किंतु सौरभ के मायाजाल में अनेक अधिकारियों के फंसे होने की खबरों से पूरा प्रशासन तंत्र सहमा हुआ है। कौन किस हद तक इस कांड से जुड़ा है ये तो जांच पूरी होने के बाद भी स्पष्ट होगा किंतु इतना तो सामान्य बुद्धि वाला भी बता देगा कि बिना ऊपरी संरक्षण के एक आरक्षक स्तर का कर्मचारी इतना बड़ा खेल करने का साहस नहीं कर सकता था। अनुकंपा नियुक्ति पाकर उसने इतनी बड़ी कमाई करने के बाद नौकरी छोड़ दी और करोड़ों का कारोबारी बन गया। एकांत स्थान पर खड़ी कार में सोने का भंडार मिलने को लेकर भी तरह - तरह की कहानियाँ सुनने मिल रही हैं। छापे से जुड़े विभागों में श्रेय लेने की होड़ मची है। आगे की कारवाई कौन करेगा इसे लेकर भी खींचतानी चल रही है। जिन नेताओं की तरफ संदेह की सुई घूम रही है वे अपनी सफाई देने में जुट गए हैं। लपेटे में आने वाले अधिकारी भी अपने संरक्षकों के चक्कर लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसी को न बख्शने की बात कहते हुए हर संभव जाँच का आश्वासन भी दिया है। लेकिन चूंकि जप्त हुई डायरी में प्रशासनिक अधिकारियों के नाम होने की चर्चा है इसलिए ये आशंका व्यक्त की जाने लगी है कि कुछ दिनों की सनसनी के बाद मामले पर पर्दा डाला जाने लगेगा, बड़े - बड़े वकील आरोपियों के बचाव में खड़े होंगे, निचली अदालत से सर्वोच्च न्यायालय तक प्रकरण चलेगा। और क्या पता आरोपी बाइज्जत बरी हो जाएं। यदि इस मामले में केवल राजनीतिक हस्तियां फंसती होतीं तो अभी तक भूचाल आ चुका होता किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के नाम डायरी में आने के बाद मामले के रफा - दफा किये जाने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। हनीट्रैप नामक कांड इसका उदाहरण है। लंबा समय नहीं बीता जब परिवहन विभाग के सर्वोच्च अधिकारी विभागीय कर्मचारियों से पैसे स्वीकार करते कैमरे में कैद हो गए। आनन - फानन उनका तबादला पुलिस मुख्यालय कर दिया गया। लेकिन इतने बड़े खुलासे के बाद जैसी कारवाई उन साहेब बहादुर पर अपेक्षित थी वह नहीं हुई। सच बात तो ये है परिवहन विभाग और भ्रष्टाचार एक दूसरे के समानार्थी हैं। ये अवधारणा बेहद मजबूत है कि इसमें भृत्य से लेकर तो शीर्ष अधिकारी तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। अपवाद स्वरूप ही कोई दूध का धुला होता होगा। इस भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होता है क्योंकि रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए वाहनों की व्यवस्था परिवहन विभाग के सौजन्य से होने के कारण इसमें जमे अधिकारी नेताओं के कृपापात्र हो जाते हैं। आज जो विपक्ष में हैं वे भी सत्ता में रहते हुए इस मुफ्त सेवा का लाभ लेते रहे। सरकार में जिन विभागों को मलाईदार कहा जाता है उनमें से परिवहन अग्रणी है। लेकिन सौरभ शर्मा ने जॊ कारनामा किया वह अभूतपूर्व है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के लिए भ्रष्टाचार के विरूद्ध जंग छेड़ने का यह अच्छा अवसर है। यदि वे इस कांड के बहाने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने का बीड़ा उठा लें तो उन्हें अप्रत्याशित जन समर्थन हासिल होगा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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