काँग्रेस के घोषणापत्र में महिलाओं को प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए देने का वायदा किया गया है। लेकिन गत दिवस म.प्र की रतलाम झाबुआ सीट के पार्टी प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया ने चुनावी सभा के मंच से अजीबोगरीब घोषणा करते हुए कहा कि जिनकी दो बीवियां हैं उनको दोगुनी रकम अर्थात 2 लाख रुपये दिये जाएंगे। उनकी इस बात का मंच पर मौजूद प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने समर्थन कर दिया। भाजपा ने फौरन इस घोषणा को तुष्टीकरण से जोड़ दिया क्योंकि 2 बीवियां रखने की अनुमति इस्लाम में ही है। काँग्रेस द्वारा वायदे से आगे निकलकर उसके प्रत्याशी द्वारा किये सार्वजनिक ऐलान का वहाँ उपस्थित पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा समर्थन किया जाना भी बेहद गैर जिम्मेदाराना कदम था। ऐसा लगता है केंद्रीय नेतृत्व के कमजोर होने के कारण काँग्रेस में ऊलजलूल बातें करने की छूट मिली हुई है। अमेठी से प्रत्याशी बनाये गए किशोरीलाल शर्मा के बारे में खुद पार्टी ने बताया कि वे चूंकि लंबे समय से रायबरेली और अमेठी में गाँधी परिवार का राजनीतिक प्रबंधन देखते आ रहे थे इसलिए बाहरी होते हुए भी स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं। लेकिन नामांकन भरने के बाद जब उनसे पूछा गया कि स्थानीय किसी कार्यकर्ता को उपेक्षित करते हुए उनको अमेठी जैसी सीट से महज इसलिए प्रत्याशी बनाया गया क्योंकि वे गाँधी परिवार के करीबी हैं तो वे तैश में आकर बोले मैं गाँधी परिवार का नौकर नहीं और न उससे कोई वेतन लेता हूँ। 40 वर्षों से काम करते रहने के कारण मेरी अपनी सियासी जमीन यहाँ तैयार हुई है। उनकी उक्त टिप्पणी से न सिर्फ आम जनता अपितु पार्टी कार्यकर्ता भी भौचक रह गए क्योंकि श्री शर्मा की पहिचान गाँधी परिवार के निजी सेवक से ज्यादा कुछ भी नहीं है। अमेरिका में बैठे ओवरसीज काँग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने पहले विरासत टैक्स जैसा विवादित मुद्दा उठाया और उसके बाद भारत के विभिन्न अंचलों में रहने वालों की तुलना अरबी, चीनी और अफ़्रीकियों से कर बवाल मचा दिया। जैसे ही उनके बयान का भाजपा और इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने विरोध शुरू किया त्योंही उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया। राहुल गाँधी ने उनके सलाहकार कहे जाने वाले श्री पित्रोदा की आलोचना से तो परहेज किया किंतु उनके बहनोई रॉबर्ट वाड्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक पढ़ा लिखा इंसान आखिर ऐसी बातें कैसे कह सकता है? लेकिन उनसे भी चार कदम आगे बढ़कर काँग्रेस के वरिष्ट नेता और म.प्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अनुज लक्ष्मण सिंह ने तो यहाँ तक कह दिया कि श्री पित्रौदा को जितने जूते मारे जाएं, कम हैं। लेकिन आश्चर्य है दिग्विजय सिंह इस बारे में मौन हैं। राहुल गाँधी भी ये तय नहीं कर पा रहे कि वे अपने बौद्धिक सलाहकार के बौद्धिक दिवालियेपन पर हँसें या रोएं। इन मुसीबतों से मुक्ति मिलती उसके पहले ही काँग्रेस के एक और बड़बोले नेता मणिशंकर अय्यर का साक्षात्कार प्रसारित होने लगा जिसमें वे ये कहते सुने जा रहे हैं कि भारत को पाकिस्तान की इज्जत करनी चाहिए क्योंकि उसके पास एटम बम है। उनके अनुसार बीते 10 साल में पड़ोसी से बातचीत बंद रखना गलत है क्योंकि अपनी उपेक्षा पर पाकिस्तान परमाणु अस्त्रों का उपयोग करने बाध्य हो सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि भारत को अपनी ताकत का प्रदर्शन करते समय याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान के पास भी वही ताकत है। श्री अय्यर विदेश सेवा में रहने के दौरान पाकिस्तान में पदस्थ भी रहे । उनका जन्म भी बंटवारे के पूर्व लाहौर में ही हुआ था। ये वही मणिशंकर हैं जिन्हें प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति अपशब्दों का उपयोग करने के कारण कुछ समय के लिए काँग्रेस ने निलंबित कर दिया था। उसके बाद से ही उनकी पूछ परख कम हो गई। वर्तमान लोकसभा चुनाव में अभी तक वे पृष्ठभूमि में थे किंतु पाकिस्तान की इज्जत किये जाने जैसे साक्षात्कार के कारण वे फिर चर्चा में आ गए। इस प्रकार काँग्रेस के लिए उसके ये अघोषित प्रवक्ता गले का फंदा बन गए हैं। पार्टी भले ही इनके बयानों से पल्ला झाड़े किंतु श्री पित्रोदा , श्री भूरिया और श्री अय्यर के ताजा बयान पार्टी के लिए समस्या बन गए हैं। जब श्री वाड्रा और लक्ष्मण सिंह जैसे लोगों ने श्री पित्रोदा के विरुद्ध कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त की हो तब आम मतदाता कितना नाराज होगा इसका अंदाज लगाया जा सकता है। श्री भूरिया द्वारा दो बीवियों पर दो लाख देने और मणिशंकर द्वारा पाकिस्तान को इज्जत देने जैसी बातें कहकर काँग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप की पुष्टि ही की। चुनाव के दौरान इस तरह की बयानबाजी काँग्रेस को हमेशा नुकसान पहुंचाती रही है। इस बार भी वैसा ही होता दिख रहा है।
-रवीन्द्र वाजपेयी
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