Friday, 24 May 2024

सीबीआई में भी भ्रष्टाचार तो भरोसा किस पर करें

प्र में 364 नर्सिंग कालेजों के फर्जीवाड़े की जांच  उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई को सौंपी गई थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 318 कालेजों की जाँच  होने के बाद उक्त एजेंसी ने 169 को क्लीन चिट भी दे दी। लेकिन कुछ दिन पहले सीबीआई द्वारा  जाँच से जुड़े अपने इंस्पेक्टर राहुल राज को ही 10 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया । सीबीआई  ने जब अपना जाल और फैलाया तो उसके कुछ और अधिकारी भी शिकंजे में फंस गए। करोड़ों रुपये नकद और आभूषण आदि भी बरामद हो चुके हैं।  सीबीआई के लोगों को घूस देकर नियम विरुद्ध क्लीन चिट हासिल करने वाले कुछ नर्सिंग कॉलेज संचालक भी गिरफ्तार हुए हैं। राहुल राज नामक घूसखोर सीबीआई इंस्पेक्टर बहुचर्चित व्यापमं घोटाले की जाँच में भी था और उसमें भी क्लीन चिट मिल गई थी। जैसे - जैसे सीबीआई इस मामले में आगे बढ़ रही है वैसे - वैसे नये - नये खुलासे हो रहे हैं। निजी नर्सिंग कॉलेजों की जरूरत इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि अस्पतालों की बढ़ती संख्या के कारण नर्सों की माँग बढ़ने लगी। एक जमाना था जब केरल  की नर्सें पूरे देश में नजर आती थीं। धीरे - धीरे उनकी माँग विदेशों में भी होने लगी।  लिहाजा  निजी क्षेत्र को नर्सिंग कॉलेज खोलने की अनुमति दी जाने लगी। इसका लाभ भी हुआ । देश भर में नर्सिंग कोर्स करने के प्रति लड़कियों ने रुचि दिखाई। अब तो लड़के भी इस पेशे में आ रहे हैं। हालांकि अभी भी माँग बनी हुई है। यही कारण है कि निजी नर्सिंग कॉलेज कमाई के साधन बन गए। इनमें प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों ही रूप में राजनेताओं का पैसा लगा हुआ है। इसीलिए निर्धारित मापदंडों को पूरा किये बिना ही मान्यता दी जाने लगी। इन कॉलेजों में पढ़ने वाले ओबीसी तथा अनु. जाति और जनजाति के छात्र - छात्राओं को सरकार छात्रवृत्ति देती है। जिसमें भारी घपलेबाजी होती है। लेकिन सबसे बड़ा घोटाला है मापदंडों पर खरा न उतरने के बावजूद कॉलेज खोलने की अनुमति मिलना। ज्यादातर कॉलेजों के पास न तो समुचित भूमि और भवन है और न ही प्रशिक्षण का सही इंतजाम। इसके बाद भी वे खुलते और चलते हैं। जब शिकायतें बढ़ीं और मामला अदालत के संज्ञान में आया तब उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जाँच की जिम्मेदारी सौंप दी। इस एजेन्सी को बेहद सक्षम, पेशेवर और कार्यकुशल माना जाता है। लेकिन राहुल राज के पकड़े जाने के बाद इसकी साख पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। चूंकि व्यापमं घोटाले की जाँच में भी उसकी सक्रिय भूमिका रही लिहाजा अब उसमें दी गई क्लीन चिट  पर भी संदेह पैदा होने लगा है। सीबीआई का अपना प्रशासनिक ढांचा है जिसमें राज्यों की पुलिस के अधिकारी भी प्रतिनियुक्ति पर जाते हैं। इसलिए ये मान लेना तो झूठी आत्म संतुष्टि होगी कि उसमें सब कुछ पाक साफ है । फिर भी इसकी साख और धाक  काफी हद तक बनी हुई है। इसीलिए संगीन किस्म के भ्रष्टाचार और अन्य अपराधों के प्रकरण इस जाँच एजेन्सी को सौंपे जाते हैं। चूंकि यह केंद्र सरकार के अधीन होती है इसलिए ये विश्वास किया जाता रहा है कि राज्य सरकार उस पर दबाव नहीं बना सकेगी। वैसे सीबीआई में भी भ्रष्ट लोग हैं ये बात पहले भी सामने आ चुकी है। उसके बड़े - बड़े अधिकारी भी घूस खाते हुए पकड़े जा चुके हैं। अनेक चर्चित प्रकरणों को सुलझाने और अपराधियों को दंडित करवाने में उसके हाथ विफलता ही लगी वहीं  कुछ मामले राजनीतिक दबाव में भी ठंडे बस्ते में डालने का आरोप  लगा। म.प्र के नर्सिंग कॉलेजों को क्लीन चिट देने के बदले करोड़ों की कमाई करने वाले सीबीआई इंस्पेक्टर और अधिकारियों का पर्दाफाश होने के बाद प्रदेश के वे सभी  कॉलेज संदेह के घेरे में आ गए जिन्हें राहुल  और उनके साथियों ने घूस खाकर उपकृत किया। वैसे ये गोरखधंधा निजी क्षेत्र के ज्यादातर शिक्षण संस्थानों में चल रहा है। पेशेवर शिक्षा के जितने भी संस्थान हैं उनमें से अधिकांश नियमों के अनुसार नहीं चलते। उनको मान्यता देने वाला जो भी अधिकृत विभाग या  अमला है उसमें ईमानदारी का  अभाव होने से अवैध को वैध करने का कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। नर्सिंग कॉलेजों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की जांच में भी भ्रष्टाचार होना चिंता का बड़ा कारण है। हालांकि कुछ लोगों की बेईमानी के कारण पूरे महकमे को कठघरे में खड़ा करना अनुपयुक्त प्रतीत होता है किंतु यदि सीबीआई में भी भ्रष्टाचार है तब किस पर भरोसा किया जावे इस सवाल का जवाब कौन देगा? 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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