Monday, 20 May 2024

ममता के बारे में अधीर रंजन की राय पूरी तरह सही है



लोकसभा चुनाव के लिए आज पाँचवे चरण का मतदान हो रहा है। इसके साथ 428 सीटों पर मतदान प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी। शेष दो चरणों में 115 सीटों का फैसला होगा। भाजपा की मानें तो चौथे चरण के बाद ही वह बहुमत  का आंकड़ा पार कर चुकी है जबकि विपक्ष उसके अधिकतम 250 सीटों तक पहुँचने की बात कर रहा है। इसी बीच तृणमूल काँग्रेस प्रमुख प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के उस बयान से विपक्षी खेमे में हलचल मच गई जिसमें उन्होंने कहा कि नतीजे आने के बाद वे सरकार बनाने के लिए इंडिया गठबंधन का बाहर से समर्थन करेंगी । वहीं प. बंगाल में उन्होंने किसी गठबंधन से इंकार करते हुए कहा कि यहाँ काँग्रेस और वामपंथी भाजपा के लिए  काम कर रहे हैं। उनके बयान पर काँग्रेस  नेता अधीर रंजन चौधरी ने कुछ समय पूर्व दिये उस बयान का हवाला दिया जिसमें तृणमूल नेत्री ने कहा था कि उनके राज्य में इंडिया ब्लाॅक का कोई अस्तित्व ही नहीं है। उल्लेखनीय है ममता ने प. बंगाल में काँग्रेस और वामपंथियों को एक भी सीट नहीं दी। यहाँ तक कि श्री चौधरी के विरुद्ध बहरामपुर सीट पर गुजरात से लाकर क्रिकेटर युसुफ पठान को खड़ा कर दिया ताकि वे साढ़े तीन लाख मुस्लिम मतों को बटोरकर काँग्रेस की हार का रास्ता साफ करें। अधीर रंजन और सुश्री बैनर्जी के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। चुनाव के दौरान ममता का ये बयान काफी चर्चित हुआ कि काँग्रेस और वामपंथियों को मत देने का अर्थ है भाजपा का समर्थन करना। उन्होंने काँग्रेस के 40 सीटों पर सिमट जाने की बात भी कही। इसके जवाब में श्री चौधरी ने दो कदम आगे बढ़कर कह दिया कि भले ही भाजपा को वोट दे देना किंतु तृणमूल को नहीं। इसीलिए बाहर से समर्थन करने वाले ममता के बयान पर उन्होंने कहा कि तृणमूल नेत्री अवसरवादी हैं। इंडिया ब्लाॅक की अच्छी स्थिति देखकर वे उसके साथ आना चाहती हैं जबकि वे उससे अलग हो चुकी थीं। ममता को अविश्वसनीय बताते हुए काँग्रेस नेता ये तक बोल गए कि वे भाजपा के साथ भी जा सकती हैं। इन दोनों के बीच  तल्खी लंबे समय से चली आ रही है। ममता काँग्रेस से इसलिए नाराज हैं क्योंकि प.बंगाल में वह उनके सबसे बड़े शत्रु वामपंथियों के साथ है। काँग्रेस ने तृणमूल से 6 लोकसभा सीटें माँगी थीं किंतु ममता दोनों को मिलाकर मात्र 2 सीटें दे रही थी।  उस वजह से राज्य में इंडिया गठबंधन  एकजुट नहीं रह सका। यदि वे अधीर रंजन की सीट ही छोड़ देतीं  तब उसे  दोस्ताना मुकाबला माना जाता किंतु बहरामपुर में  श्री चौधरी को चक्रव्यूह में फंसाकर उन्होंने गठबंधन की रही - सही संभावना भी समाप्त कर डाली। इसीलिए जब उन्होंने विपक्षी गठबंधन की सरकार बनने पर बाहर से समर्थन की बात कही तो श्री चौधरी भन्ना गए और सुश्री बैनर्जी को अवसरवादी और गैर भरोसेमंद कहकर विरोध कर डाला। लेकिन काँग्रेस  अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अधीर रंजन को फटकारते हुए कह दिया कि केंद्र में सरकार बनाने का काम हाई कमान का है और यदि श्री चौधरी को उसका फैसला मंजूर नहीं तो वे पार्टी छोड़कर जा सकते हैं। जवाब में अधीर रंजन ने कहा कि वे भी काँग्रेस कार्यसमिति के सदस्य होने के नाते उच्च नेतृत्व का हिस्सा हैं। इस टकराव का असर यहाँ तक देखने मिला कि प. बंगाल में लगे काँग्रेस के बैनर पर अंकित श्री खरगे के चित्र पर कालिख पोत दी गई। इस लड़ाई में श्री चौधरी अकेले पड़ते दिख रहे हैं क्योंकि विपक्ष के अनेक नेताओं द्वारा  ममता के बयान का स्वागत  कर दिया गया। लेकिन  लोकसभा में अपने नेता को जिस तरह काँग्रेस ने लताड़ा वह अच्छा संकेत नहीं है। प्रणब मुखर्जी के बाद श्री चौधरी ही इस राज्य में काँग्रेस की पहिचान जीवित रखे हुए हैं। उनकी उपेक्षा से ये साबित हो गया कि काँग्रेस क्षेत्रीय दलों के सामने आसानी से घुटने टेक देती है। पंजाब और दिल्ली में उसने आम आदमी पार्टी के सामने आत्म समर्पण कर दिया। उ.प्र में वह 17 और बिहार में 9 सीटें लेकर ही संतुष्ट हो गई। ममता ने उसे एक भी  सीट न देकर एक तरह से गठबंधन से किनारा कर लिया था। लेकिन अचानक  इंडिया गठबंधन की सरकार को बाहर से समर्थन देने संबंधी उनके बयान पर काँग्रेस हाई कमान के बल्लियों उछलने से प्रदेश नेतृत्व के तो पर ही कट गए। हालाँकि 4 जून को क्या होगा ये तो कोई नहीं बता सकता किंतु अधीर रंजन ने ममता के बारे में जो कुछ कहा वह पूरी तरह सच है। वर्तमान भारतीय राजनीति में सबसे तुनक मिजाज शख्सियत के तौर पर उन्हें माना जा सकता है। जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली और पंजाब में काँग्रेस का सफाया कर दिया ठीक वही काम ममता ने प. बंगाल में कर दिखाया।

- रवीन्द्र वाजपेयी


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