आम आदमी पार्टी लोकसभा की मात्र 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वह इंडिया नामक गठबंधन का भी हिस्सा है जिसके तहत उसने काँग्रेस को दिल्ली में तीन सीटें दीं। स्मरणीय है दिल्ली सरकार की शराब नीति में भ्रष्टाचार की शिकायत सबसे पहले काँग्रेस द्वारा ही की गई थी। इसीलिए जब गत वर्ष उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी हुई तब दिल्ली काँग्रेस के वरिष्ट नेता अजय माकन ने उसका स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी कारवाई की मांग कर डाली थी। हालांकि अभिषेक मनु सिंघवी और जयराम रमेश ने गिरफ्तारी का विरोध किया वहीं पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आम आदमी पार्टी पर ये कहते हुए हमला किया कि जब सोनिया गाँधी और राहुल को ईडी घेर रही थी तब उसने मौन साधे रखा था। उस समय काँग्रेस ने आम आदमी पार्टी के कार्यालय का भी घेराव किया था। लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों एक मंच पर आ गए। काँग्रेस को अब शराब नीति विरोधी अपनी शिकायत याद नहीं है। इसीलिए जब श्री केजरीवाल गिरफ्तार हुए तब पार्टी के बड़े नेताओं ने उसकी निंदा कर डाली। उनको जेल से बाहर निकालने के लिए काँग्रेस नेता प्रख्यात अधिवक्ता श्री सिंघवी ने धरती - आसमाँ एक कर दिया। ये बात बिल्कुल सही है कि यदि शराब घोटाले में न फंसती तो आम आदमी पार्टी दिल्ली में काँग्रेस को घास नहीं डालती। इसी तरह काँग्रेस को ये लगा कि दिल्ली में उसके हाथ पूरी तरह खाली हैं इसलिए वह तीन सीटों पर ही लड़ने के लिए राजी हो गई। चुनाव प्रचार के नाम पर जब श्री केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिली तो उनकी पार्टी से अधिक खुश काँग्रेस हुई क्योंकि उसे लगा कि उनके सहारे उसकी नैया भी पार हो जायेगी। हालांकि काँग्रेस के ज्यादातर स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इस समझौते को पचा नहीं पा रहे। प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली सहित बहुत से लोगों ने पार्टी से किनारा भी कर लिया। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित भी आम आदमी पार्टी के अलावा पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाये जाने का खुलकर विरोध कर चुके हैं। रोचक तथ्य ये है कि दिल्ली में काँग्रेस का समर्थन कर रहे श्री केजरीवाल ने पंजाब में काँग्रेस को पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया और उसके लिए एक भी सीट नहीं छोड़ी। जानकार बताते हैं कि काँग्रेस को श्री केजरीवाल ने पूरी तरह बेवकूफ बना दिया। उनको डर था कि वह मैदान से हटी तब उसके समर्थक भाजपा अथवा अकाली दल के पाले में जा सकते हैं जिससे आम आदमी पार्टी को नुकसान होना तय है। इसीलिए उन्होंने काँग्रेस को चुनाव लड़ने उकसा दिया। इस तरह इंडिया गठबंधन के दोनों घटक एक दूसरे के सामने तलवार भाँज रहे हैं। काँग्रेस जहाँ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर जमकर हमले कर रही है वहीं श्री मान का कहना है उन्होंने अनेक काँग्रेसियों को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेज दिया इसीलिए वह उनका विरोध कर रही है। दिल्ली की तरह से ही पंजाब के कॉंग्रेसी भी आम आदमी पार्टी से नफरत करते हैं। दोनों राज्यों में उसी की वजह से काँग्रेस धरती पर आ गिरी। पिछले लोकसभा चुनाव में उसे इस राज्य में अच्छी सफलता मिली किंतु विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया। सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी ने काँग्रेस सरकार के दौर में हुए भ्रष्टाचार की जाँच शुरू करवाई और उसके अनेक नेता गिरफ्तार कर लिए गए। इसे लेकर दोनों के बीच दुश्मनी बढती चली गई। लेकिन इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी के शामिल हो जाने के बाद पंजाब के कांग्रेसियों की स्थिति दयनीय होकर रह गई है। भले ही पार्टी के हाथ से सत्ता खिसक चुकी हो किंतु गठबंधन धर्म के अनुसार काँग्रेस राज्य में पाँच - छह सीटों की हकदार तो थी ही। दिल्ली में भी बंटवारा इसी आधार पर हुआ है। लेकिन श्री केजरीवाल ने पंजाब में उसे उपकृत करने से इंकार कर दिया। उनके इस रवैये से वैसे तो काँग्रेस का उच्च नेतृत्व भी असहज अनुभव कर रहा है किंतु बजाय छोटी सी पार्टी को दबाने के वह उसका दबाव झेल रहा है। जिस तरह पंजाब में आदमी पार्टी ने एकला चलो की नीति अपनाई यदि वैसी ही काँग्रेस दिल्ली में दिखाती तो श्री केजरीवाल की साँसें फूलने लग जातीं। लेकिन काँग्रेस नेतृत्व न जाने किस डर से उनके सामने झुक गया जबकि मौजूदा परिस्थिति में काँग्रेस थोड़ा सा कड़ा रुख दिखाती तो आम आदमी पार्टी के सामने उसकी शर्तों को मानने के अलावा कोई चारा ही नहीं था। दुर्भाग्य से जिन क्षेत्रीय पार्टियों ने काँग्रेस की ये दुर्गति की वह उन्हीं के भरोसे दोबारा खड़े होने के ख्वाब देख रही है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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