न तो घटना पुरानी है और न ही विरोधियों द्वारा तैयार की गई पटकथा पर आधारित तथ्यहीन आरोप। दिल्ली के मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के साथ हाथापाई हुई और वह भी मुख्यमंत्री के सचिव विभव कुमार द्वारा। सांसद ने पुलिस को फोन भी किया, थाने भी पहुंची किंतु रिपोर्ट नहीं लिखवाई। उसके बाद वे लापता हो गईं। सोशल मीडिया पर भी नहीं दिखी। वे दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सबसे बड़ी बात ये कि अरविंद केजरीवाल के शुरुआती साथियों में उनकी गिनती होती रही। चूंकि प्रकरण चर्चा में आ गया लिहाजा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पत्रकार वार्ता बुलाकर स्वाति के साथ श्री केजरीवाल के सचिव द्वारा की गई मारपीट को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी ऐसी बातों को सहन नहीं करेगी और मुख्यमंत्री दोषी विभव पर कारवाई करेंगे। चूंकि स्वाति ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई और कोई बयान भी नहीं दिया तो लगा घर की बात घर में ही रह गई। गत दिवस लखनऊ यात्रा में श्री केजरीवाल और श्री सिंह के साथ विभव कुमार की मौजूदगी से मामला ठण्डा पड़ने का संकेत भी मिला। लेकिन शाम होते - होते स्वाति ने बाकायदा लिखित शिकायत पुलिस को की जिसने उनके बयान भी लिए। शिकायत के अनुसार सुश्री मालीवाल के साथ काफी मारपीट की गई। जैसा बताया गया उसके अनुसार वे मुख्यमंत्री से मिलने गई थीं किंतु विभव ने उनको रोका जिस पर कहा सुनी हुई और फिर वही हुआ जो शिकायत में उल्लिखित है। एक चर्चा ये भी चली कि श्री केजरीवाल उन्हें जमानत दिलवाने वाले अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा सीट का आश्वासन दे चुके थे। उसके लिए स्वाति पर सदस्यता छोड़ने का दबाव बनाया गया जिसके विरुद्ध वे मुख्यमंत्री से मिलने गईं जहाँ उक्त वारदात घट गई। बहरहाल मामला पुलिस के पास है। पीड़िता अपना बयान दे चुकी हैं। विभव पर धाराएँ भी लग गईं। हो सकता है उनको गिरफ्तार कर लिया जाए। लेकिन इस सबके बीच श्री केजरीवाल की चुप्पी से चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा मौके का लाभ उठाने आगे आ गई है। प्रियंका वाड्रा ने घटना की निंदा तो की किंतु महिला सांसद के साथ हुई मारपीट पर श्री केजरीवाल की चुप्पी पर कोई टिप्पणी नहीं की। निश्चित रूप से ये प्रकरण कर्नाटक के यौन उत्पीड़न से अलग मामला है किंतु मुख्यमंत्री के आवास पर उनका सचिव उन्हीं की पार्टी की महिला सांसद की लात - घूँसों से धुनाई करे तो उसे छोटी बात मानना गलत होगा। लोकसभा चुनाव के कारण श्री केजरीवाल सार्वजनिक रूप से चुप रहने की नीति पर चल रहे हैं किंतु विभव कुमार को अब तक नहीं हटाये जाने से उन पर जो अंगुलियाँ उठ रही हैं उन्हें गलत नहीं कहा जा सकता। इससे इस आरोप की पुष्टि हो रही है कि सुश्री मालीवाल के साथ मारपीट करने वाले को ऊपर से शह मिली हुई थी। श्री केजरीवाल घटना के समय दूसरे कमरे में मौजूद रहे किंतु उन्होंने बाहर आकर मामला ठण्डा करवाने कुछ किया हो ये भी कोई नहीं बता रहा। इससे रहस्य का पर्दा और गहरा होता जा रहा है। स्वाति के पूर्व पति के बयान मामले को दूसरा मोड़ दे रहे हैं। चूंकि चुनाव चल रहे हैं इसलिए भाजपा का आक्रामक होना तो स्वाभाविक है किंतु काँग्रेस और इंडिया गठबंधन की अन्य पार्टियां भी चूंकि बचाव नहीं कर पा रहीं इसलिए जेल से निकलते ही भाजपा और प्रधानमंत्री पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे श्री केजरीवाल मुँह में दही जमाकर बैठ गए। होना तो यह चाहिए था कि अब तक वे विभव कुमार को पुलिस के हवाले करते । स्वाति के बयान हो जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी बुरी तरह घिर गई है। चूंकि वारदात श्री केजरीवाल के आवास पर घटित हुई इसलिए वे अपना पिंड नहीं छुड़ा सकते। दिल्ली में 25 मई को मतदान है। उसके पहले हुआ यह कांड चुनाव को कितना प्रभावित करेगा ये कहना तो जल्दबाजी होगी लेकिन इससे ये बात एक बार फिर प्रमाणित हो गई कि आम आदमी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। उसकी स्थापना करने वाले तमाम दिग्गजों को जिस प्रकार बाहर जाने मजबूर किया गया वह किसी से छिपा नहीं है। लगता है स्वाति मालीवाल का नाम भी उसी सूची में जुड़ने जा रहा है। जिन्हें मुख्यमंत्री से मुलाकात के बदले मुक्के - लात मिले। दिल्ली सरकार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं आतिशी मार्लेना का मौन भी चौंकाने वाला है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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